पटना: 11 अगस्त 1942 की सुबह पटना में माहौल बेहद तनावपूर्ण था। भारत छोड़ो आंदोलन के आह्वान के बाद हजारों छात्र हाथों में तिरंगा लेकर सचिवालय की ओर बढ़ रहे थे। उनका उद्देश्य किसी हिंसा या तोड़फोड़ का नहीं, बल्कि अंग्रेजी शासन के प्रतीक माने जाने वाले सचिवालय भवन पर राष्ट्रीय ध्वज फहराना था। सचिवालय के पास पहुंचते ही पुलिस ने जुलूस को रोकने की कोशिश की। दोपहर तक तनाव बढ़ता गया और फिर गोलीबारी शुरू हो गई। इस फायरिंग में सात छात्र गंभीर रूप से घायल हुए और उसी दिन पटना जनरल अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई।
भारत छोड़ो आंदोलन में पटना के छात्रों की भूमिका
8 अगस्त 1942 को भारत छोड़ो आंदोलन की घोषणा के बाद देशभर में ब्रिटिश शासन के खिलाफ जनआंदोलन तेज हो गया। बिहार में बड़े नेताओं की गिरफ्तारी के बाद आंदोलन की कमान छात्रों और युवाओं ने संभाली। पटना में भी छात्रों ने संगठित होकर सचिवालय पर तिरंगा फहराने की योजना बनाई।
11 अगस्त को लगभग 6,000 छात्र इस जुलूस में शामिल हुए थे। इनमें स्कूलों के छात्र, कॉलेज के विद्यार्थी और युवा कार्यकर्ता शामिल थे। सचिवालय के पास पहुंचने पर जिला मजिस्ट्रेट डब्ल्यू. जी. आर्चर के नेतृत्व में पुलिस बल तैनात था। जुलूस को रोकने की कोशिश की गई, लेकिन भीड़ आगे बढ़ती रही। इसके बाद गोलीबारी हुई, जिसमें सात छात्रों की जान चली गई।
कौन थे वो सात छात्र?
इस घटना में शहीद हुए सातों युवा अलग-अलग स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ रहे थे। इनमें अधिकांश की उम्र कम थी और वे उस समय विद्यार्थी जीवन में थे।
- उमाकांत प्रसाद सिन्हा (रमन जी) – राम मोहन राय सेमिनरी, कक्षा IX, नरेंदरपुर, सारण
- रामानंद सिंह – राम मोहन राय सेमिनरी, कक्षा IX, सहादत नगर, पटना
- सतीश प्रसाद झा – पटना कॉलेजिएट स्कूल, कक्षा X, खड़हरा, भागलपुर
- जगतपति कुमार – बिहार नेशनल कॉलेज, द्वितीय वर्ष, खराटी, औरंगाबाद
- देवीपद चौधरी – मिलर हाई इंग्लिश स्कूल, कक्षा IX, सिलहट, जमालपुर
- राजेंद्र सिंह – पटना हाई इंग्लिश स्कूल, कक्षा X, बनवारी चक, सारण
- रामगोविंद सिंह – पुनपुन हाई इंग्लिश स्कूल, कक्षा IX, दशरथा, पटना

एक गिरा तो दूसरे ने संभाला तिरंगा
ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, गोलीबारी के दौरान तिरंगा थामे एक छात्र के गिरने पर दूसरे ने झंडा संभाल लिया और आगे बढ़ता रहा। इस तरह तिरंगा हाथ बदलता रहा, लेकिन सचिवालय तक पहुंचने की कोशिश नहीं रुकी। इसी दौरान सात छात्र गोलीबारी में शहीद हुए।
राम कृष्ण सिन्हा और तिरंगे की कहानी
इसी घटना का एक महत्वपूर्ण लेकिन कम चर्चित हिस्सा राम कृष्ण सिन्हा से जुड़ा है। The Telegraph के अनुसार, वे उस समय पटना कॉलेज के तृतीय वर्ष के छात्र थे। उन्होंने स्वयं को माली के वेश में छिपाकर सचिवालय परिसर में प्रवेश किया और वहां तिरंगा फहराया। इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। 1948 में पटना जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय से जारी एक प्रमाण-पत्र में भी उनके 11 अगस्त 1942 को सचिवालय में प्रवेश और गिरफ्तारी का उल्लेख मिलता है। बाद में उन्हें जेल भी भेजा गया।
शहीद स्मारक और ऐतिहासिक स्मृति
पटना सचिवालय के सामने स्थित शहीद स्मारक इसी घटना की स्मृति में बनाया गया है। इसकी आधारशिला 15 अगस्त 1947 को बिहार के तत्कालीन राज्यपाल जयरामदास दौलतराम ने रखी थी। प्रसिद्ध मूर्तिकार देवी प्रसाद राय चौधरी ने सात शहीद छात्रों की कांस्य प्रतिमाएं तैयार कीं, जिन्हें बाद में इटली में ढाला गया और पटना लाया गया।
1956 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने इस स्मारक का उद्घाटन किया। आज यह स्थल 11 अगस्त 1942 की उस ऐतिहासिक घटना की स्मृति का प्रमुख केंद्र है।



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