मुजफ्फरपुर: बढ़ते वायु प्रदूषण पर नियंत्रण और शहर की हवा की गुणवत्ता में सुधार के लिए मुजफ्फरपुर को नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) के तहत शामिल किया गया है। बिहार के जिन शहरों को इस केंद्रीय योजना में स्थान मिला है, उनमें पटना, गया और मुजफ्फरपुर शामिल हैं। नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण विभाग की ओर से तैयार कार्ययोजना के आधार पर शहर को करीब ₹24 करोड़ तक की वित्तीय सहायता मिलने की संभावना है। अंतिम स्वीकृति संबंधित सरकारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद मिलेगी।
NCAP के तहत मिलने वाली राशि का उपयोग वायु प्रदूषण कम करने, सड़क की धूल नियंत्रित करने, हरित क्षेत्र बढ़ाने, कचरा प्रबंधन मजबूत करने और वायु गुणवत्ता में सुधार लाने से जुड़े विभिन्न कार्यों पर किया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि योजना लागू होने के बाद शहर में प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में दीर्घकालिक सुधार देखने को मिल सकता है।
मुख्य सचिव स्तर पर होगी समीक्षा बैठक
योजना के क्रियान्वयन को लेकर राज्य स्तर पर तैयारियां तेज हो गई हैं। एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग कमेटी (AQMC) की बैठक मुख्य सचिव स्तर पर प्रस्तावित है, जिसमें मुजफ्फरपुर समेत चयनित शहरों की कार्ययोजना, फंड आवंटन और परियोजनाओं की प्राथमिकताओं पर चर्चा की जाएगी।
बैठक में यह भी तय किया जाएगा कि पहले चरण में किन परियोजनाओं को मंजूरी दी जाए और उपलब्ध राशि का उपयोग किस प्रकार किया जाए, ताकि प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों का अधिकतम प्रभाव दिखाई दे।
NCAP क्या है?
नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) केंद्र सरकार की एक राष्ट्रीय योजना है, जिसकी शुरुआत देश के उन शहरों में वायु प्रदूषण कम करने के उद्देश्य से की गई थी जहां प्रदूषण का स्तर लगातार चिंता का विषय रहा है। इस कार्यक्रम के तहत स्थानीय निकायों और राज्य सरकारों को शहर-विशिष्ट कार्ययोजना तैयार करनी होती है, जिसमें प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों की पहचान कर उन्हें कम करने के उपाय शामिल किए जाते हैं।
योजना के तहत नियमित एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग, धूल नियंत्रण, हरित क्षेत्र का विस्तार, वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन, यातायात प्रबंधन और जनजागरूकता जैसे उपायों पर विशेष जोर दिया जाता है।
मुजफ्फरपुर में तीन मॉडल वार्ड विकसित किए जाएंगे
नगर निगम ने योजना के तहत शहर में तीन मॉडल वार्ड विकसित करने की तैयारी शुरू कर दी है। वार्ड स्तर पर स्वच्छ वायु सर्वेक्षण पूरा होने के बाद इन वार्डों का चयन किया गया है।
- वार्ड संख्या 21 को पहले ही मॉडल वार्ड के रूप में विकसित करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
- अब वार्ड संख्या 11 और वार्ड संख्या 20 को भी मॉडल वार्ड बनाने की तैयारी की जा रही है।
- दोनों वार्डों के लिए विशेष फंड का प्रस्ताव संबंधित विभाग के माध्यम से केंद्र सरकार को भेजा गया है।
इन मॉडल वार्डों में प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े उपायों को प्राथमिकता के आधार पर लागू किया जाएगा। यदि इनका परिणाम सकारात्मक रहता है, तो भविष्य में अन्य वार्डों में भी इसी मॉडल को लागू किया जा सकता है।
किन इलाकों पर पड़ेगा सबसे अधिक असर?
चयनित तीनों वार्ड शहर के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में शामिल हैं।
वार्ड संख्या 21 में बाबा गरीबनाथ धाम स्थित है, जहां पूरे वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और सावन के दौरान लोगों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है।
वार्ड संख्या 20 में सूतापट्टी, सरैयागंज टावर, लहठी मंडी और इस्लामपुर जैसे प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र आते हैं। यहां दिनभर भारी यातायात और व्यापारिक गतिविधियां होती हैं, जिससे धूल और वाहनों से निकलने वाले प्रदूषकों का प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक रहता है।
वहीं वार्ड संख्या 11 में कमिश्नर कार्यालय, जिला पदाधिकारी (DM) कार्यालय, नगर निगम, न्यायालय परिसर और मुजफ्फरपुर जंक्शन जैसे महत्वपूर्ण सरकारी एवं सार्वजनिक संस्थान स्थित हैं। इस क्षेत्र में प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही होती है।
किन कार्यों पर खर्च होगी राशि?
कार्ययोजना के अनुसार उपलब्ध राशि का उपयोग मुख्य रूप से निम्न कार्यों में किया जा सकता है—
- सड़कों की मैकेनिकल सफाई और धूल नियंत्रण
- हरित क्षेत्र एवं ग्रीन बेल्ट का विकास
- निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के उपाय
- ठोस कचरा प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करना
- प्रदूषण निगरानी व्यवस्था में सुधार
- सार्वजनिक स्थानों की पर्यावरणीय गुणवत्ता बढ़ाना
- जागरूकता अभियान और स्थानीय स्तर पर पर्यावरण संरक्षण गतिविधियां
इन उपायों का उद्देश्य शहर के एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) में सुधार लाना और नागरिकों के लिए बेहतर पर्यावरण उपलब्ध कराना है।
AQI सुधार पर रहेगा विशेष फोकस
मुजफ्फरपुर में सर्दियों के दौरान कई बार वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में पहुंच जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार सड़क की धूल, वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण गतिविधियां और कचरे का अनुचित प्रबंधन शहरी प्रदूषण के प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
NCAP के तहत इन स्रोतों की पहचान कर चरणबद्ध तरीके से नियंत्रण की योजना बनाई गई है। अधिकारियों का कहना है कि मॉडल वार्डों में लागू होने वाले उपायों की नियमित निगरानी भी की जाएगी, ताकि उनके प्रभाव का मूल्यांकन किया जा सके।
पूरे शहर के लिए तैयार होगा मॉडल
नगर निगम का उद्देश्य केवल तीन वार्डों तक योजना सीमित रखना नहीं है। यदि चयनित वार्डों में प्रदूषण नियंत्रण के उपाय सफल रहते हैं, तो भविष्य में इसी मॉडल को शहर के अन्य क्षेत्रों में भी लागू किया जा सकता है। इससे स्वच्छ वायु, बेहतर शहरी प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को व्यापक स्तर पर बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
मुख्य बातें
- मुजफ्फरपुर को नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) में शामिल किया गया।
- बिहार से पटना, गया और मुजफ्फरपुर इस योजना का हिस्सा हैं।
- शहर को करीब ₹24 करोड़ तक की वित्तीय सहायता मिलने की संभावना।
- वार्ड संख्या 11, 20 और 21 को मॉडल वार्ड के रूप में विकसित किया जाएगा।
- सड़क की धूल, कचरा प्रबंधन, ग्रीन बेल्ट और वायु गुणवत्ता सुधार पर रहेगा विशेष फोकस।
- AQMC की मुख्य सचिव स्तर की बैठक में कार्ययोजना और फंड आवंटन पर फैसला होगा।

Leave a Reply