बिहार में ₹51,626 करोड़ के निवेश प्रस्तावों पर MoU, स्टील, न्यूक्लियर एनर्जी, टेक्सटाइल और फार्मा सेक्टर पर फोकस

पटना: बिहार में औद्योगिक निवेश बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए उद्योग विभाग ने विभिन्न औद्योगिक समूहों के साथ करीब ₹51,626 करोड़ के निवेश प्रस्तावों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौते मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की मौजूदगी में आयोजित कार्यक्रम में हुए। प्रस्तावित निवेश स्टील, मेटल, न्यूक्लियर एवं क्लीन एनर्जी, टेक्सटाइल, फार्मा, फूड प्रोसेसिंग और विज्ञान एवं नवाचार जैसे क्षेत्रों से जुड़े हैं। सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन से औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार होगा और प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में कहा कि बिहार में स्टील एवं मेटल आधारित उद्योगों के विस्तार की पर्याप्त संभावनाएं हैं और सरकार राज्य को देश के प्रमुख स्टील हब के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने विभागों को निर्देश दिया कि निवेश प्रस्ताव केवल समझौते तक सीमित न रहें, बल्कि परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से जमीन पर उतारने के लिए मिशन मोड में काम किया जाए।

किन क्षेत्रों में होगा निवेश?

हस्ताक्षरित MoU के अनुसार सबसे अधिक निवेश न्यूक्लियर एवं क्लीन एनर्जी और स्टील सेक्टर में प्रस्तावित है। इसके अलावा टेक्सटाइल, फार्मा, फूड प्रोसेसिंग और विज्ञान एवं नवाचार से जुड़े उद्योगों में भी निवेश की योजनाएं शामिल हैं। सरकार का मानना है कि इन क्षेत्रों में औद्योगिक इकाइयों की स्थापना से राज्य के विनिर्माण क्षेत्र को गति मिलेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

स्टील सेक्टर पर सबसे बड़ा दांव

कार्यक्रम में कई इस्पात कंपनियों ने बिहार में निवेश के लिए रुचि दिखाई। प्रस्तावित निवेश इस प्रकार हैं—

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कंपनीक्षेत्रप्रस्तावित निवेश
श्याम स्टील मैन्युफैक्चरिंग लिमिटेडस्टील₹5,000 करोड़
शाकंभरी इस्पात एंड पावर लिमिटेडस्टील₹5,000 करोड़
नक्षित आयरन एंड स्टील प्राइवेट लिमिटेडस्टील₹6,836 करोड़
श्रीलंगटा बाबा मेटल्स एंड पावर लिमिटेडस्टील₹5,500 करोड़
अंकुर स्टील प्राइवेट लिमिटेडस्टील₹6,000 करोड़
श्रीसमृद्धि स्टील प्राइवेट लिमिटेडस्टील₹290 करोड़

इन छह कंपनियों के प्रस्तावों को जोड़ने पर स्टील एवं मेटल सेक्टर में लगभग ₹28,626 करोड़ के निवेश प्रस्ताव सामने आते हैं। सरकार का कहना है कि बड़े स्टील संयंत्रों की स्थापना से राज्य में औद्योगिक गतिविधियों के साथ सप्लाई चेन और सहायक उद्योगों को भी बढ़ावा मिल सकता है।

न्यूक्लियर एवं क्लीन एनर्जी में सबसे बड़ा एकल प्रस्ताव

कार्यक्रम के दौरान ग्लोबल रिनिवेबल एडवांस्ड क्लीन एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड (GRACE) ने न्यूक्लियर एवं क्लीन एनर्जी क्षेत्र में ₹22,500 करोड़ के निवेश प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए। यह इस कार्यक्रम का सबसे बड़ा एकल निवेश प्रस्ताव है। हालांकि परियोजना का स्थान, चरणबद्ध निवेश और समय-सीमा जैसी विस्तृत जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।

टेक्सटाइल, विज्ञान एवं नवाचार में भी निवेश

सरकार ने टेक्सटाइल सेक्टर को रोजगार की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताते हुए इस क्षेत्र में निवेश बढ़ाने पर जोर दिया। कार्यक्रम के दौरान—

  • क्रिएटिव ग्रुप – ₹250 करोड़ (टेक्सटाइल)
  • अनुभव एपरेल्स प्राइवेट लिमिटेड – ₹50 करोड़ (टेक्सटाइल)
  • भारत साइंस एंड इनोवेशन प्राइवेट लिमिटेड – ₹200 करोड़ (विज्ञान एवं नवाचार)

के निवेश प्रस्तावों पर भी MoU किए गए। सरकार का मानना है कि विशेष रूप से टेक्सटाइल उद्योग श्रम-प्रधान क्षेत्र होने के कारण बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा कर सकता है।

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फूड प्रोसेसिंग और फार्मा पर भी जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में फूड प्रोसेसिंग और फार्मा सेक्टर की भी पर्याप्त संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि कृषि आधारित उद्योगों के विस्तार से किसानों को बेहतर बाजार मिल सकता है, जबकि फार्मा और स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश से औद्योगिक विविधीकरण को बढ़ावा मिलेगा। हालांकि इस कार्यक्रम में इन क्षेत्रों के लिए अलग-अलग निवेश राशि का विस्तृत ब्योरा साझा नहीं किया गया।

बिहार बिजनेस कनेक्ट 2026 की तैयारियों की समीक्षा

MoU हस्ताक्षर कार्यक्रम से पहले मुख्यमंत्री ने बिहार बिजनेस कनेक्ट 2026 की तैयारियों की भी समीक्षा की। सरकार का उद्देश्य इस आयोजन के माध्यम से देश और विदेश के निवेशकों को बिहार में उपलब्ध औद्योगिक अवसरों से जोड़ना और विभिन्न क्षेत्रों में नए निवेश आकर्षित करना है। इससे पहले भी राज्य सरकार निवेशक सम्मेलनों और औद्योगिक संवाद कार्यक्रमों के जरिए निवेश बढ़ाने की रणनीति पर काम करती रही है।

उद्योगपतियों से बिहार में निवेश की अपील

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने बिहार से बाहर कारोबार कर रहे उद्योगपतियों और उद्यमियों से राज्य में निवेश करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार निवेशकों को आवश्यक सहयोग और अनुकूल औद्योगिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है तथा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ाकर परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाई जाएगी।

निवेश प्रस्तावों का क्या मतलब है?

उद्योग जगत में MoU (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) किसी प्रस्तावित निवेश के लिए शुरुआती समझौता होता है। इसके बाद परियोजनाओं को भूमि, पर्यावरणीय मंजूरी, वित्तीय स्वीकृति और अन्य नियामकीय प्रक्रियाओं से गुजरना होता है। इसलिए MoU पर हस्ताक्षर का अर्थ यह नहीं है कि पूरी निवेश राशि तुरंत खर्च हो जाएगी, बल्कि यह प्रस्तावित परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की शुरुआती औपचारिक प्रक्रिया है।

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